कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़,
ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया
"ना वो पूछती है, ना मैं बताता हूँ,अचानक मैं गुम-सा हो जाता हूँ,फिर मिलता हूँ पहली बार की तरह,इश्क़ फिर नया उसी से कर जाता हूँ l"
हमारी गलतियों से कही टूट न जाना,
हमारी शरारत से कही रूठ न जाना,
तुम्हारी चाहत ही हमारी जिंदगी हैं,
इस प्यारे से बंधन को भूल न जाना.
नए वर्ष में हर रोज खुशियों की बरसात होगी
याद आयेगी हमारी तो बीते कल को पलट लेना ..
यूँ ही किसी पन्ने में मुस्कुराते हुए मिल जायेंगे ..