क्या तुम समझ जाओगी,क्या मैं समझा पाउँगा lइसी द्वन्द में जब रहता हूँ,कहते कहते भी,तभी चुप रहता हूँ l
"कोई गीत ओंठो पे, ठहर जाती है,फिर तेरी याद बहुत आती है,तेरे हाथो के तरफ, मेरे हाथो का सफऱ,अधूरी है, देखो!पूरी ही नहीं हो पाती है l"
किसी की याद से इस उम्र में दिल की मुलाक़ातें
ठिठुरती शाम में इक धूप का कोना ज़रूरी है
शायर तो हम
“दिल” से है….
कमबख्त “दिमाग” ने
व्यापारी बना दिया.
मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदलकर देख,
मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकलकर देख…!
वो दिल ही क्या जो वफ़ा ना करे,
तुझे भूल कर जिएं कभी खुदा ना करे,
रहेगी तेरी दोस्ती मेरी जिंदगी बन कर,
वो बात और है, अगर जिंदगी वफ़ा ना करे