सारा जहाँ है जिसकी शरण में…
नमन है उस शिव के चरण में…
बने उस शिव के चरणों की धूल…
आओ मिलकर चढ़ायें हम श्रद्धा के फूल…
कविता के कई मतलब हो सकते हैपर कविता कभी मतलबी नहीं हो सकती !!
काशी कबहु ना छोड़िए, विश्वनाथ का धाम..मरने पर गंगा मिले, जियते लंगड़ा आम..
कहानी खत्म होती है,
मरती नहीं है,
रह जाती है हमेशा,
हर किसी के दिल में l
तरस जाओगे हमारे मुँह से सुनने को एक लव्ज़
प्यार की बात क्या, हम शिकायत भी ना करेंगे…