ख़ुद को भूला हूँ उस को भूला हूँउम्र भर की यही कमाई है ...
सोचते -सोचते गुजरा,मीलों का सफ़र lकब लगी आँखना थी नींद को भी खबर lजागते-जागते यूँ ही,रात गुजर जाती है l
शुभ रात्रि
हमारी गलतियों से कही टूट न जाना,
हमारी शरारत से कही रूठ न जाना,
तुम्हारी चाहत ही हमारी जिंदगी हैं,
इस प्यारे से बंधन को भूल न जाना.