जो सुनता हूँ सुनता हूँ मैं अपनी ख़मोशी सेजो कहती है कहती है मुझ से मेरी ख़ामोशी
जो दिखा तुम्हारी आँखों में अश्क ,ये दर्द थोड़ा जादा बढ़ गया lहो गया फिर से तुमसे इश्क ,ये दिल फिर से नया हो गया l
बेतहाशा इश्क जो तुमसे करने लगे है,यही वजह है की और तन्हा रहने लगे है lपर तन्हाई में भी तन्हा नहीं हूँ मैं,मेरे साथ मेरा यारा,हमेशा रहने लगा है l
उम्र चाहे कितनी भी हो,सुना है दिल पे झुर्रियाँ नहीं पड़ती ।
"इतवार को मिले फुर्सत,तुमसे मिलने की हसरत,ये दो ख़्वाब है जो,रोज मैं देखता हूँ l"
"खुशी में,महीनों की दूरी भी सह जाते है,नाराजगीं में, एक पल भी ना काट पाते है l"