शिकायत तों मुझे खुद से है,
तुझसे तो आज भी इश्क है !
हमने सुना है रहती है अब बेकरार वो,
छुपके किसी का करती है इंतजार वो!
कितना भी कह लूँ,कुछ बाकी रह जाता है lकितना भी पी लूँ,बिन साक़ी अधूरा रह जाता है l
दिल भी पागल है कि उस शख़्स से वाबस्तासेहैजो किसी और का होने दे न अपना रक्खे
"ग़र जुदाई से खुश हो,तो जुदाई माँग लेता,
मुझसे तेरी नासाज तबीयत ना मांगी जायेगी l"