फिर लगेगी नजर उस पगली को,
देखो आज वो फिर से काजल लगाना भूल गई।
उन्होंने ज़ुल्फें क्या झटकी अपनी,
सारे शहर में बारिश हो गई!!
"मैं हज़ारों से मिल रहा हूँ,सैकड़ो से बातें करता हूँ,कमी तुम्हारी पूरी ना हुई,सब में तुम्हीं को ढूंढ रहा हूँ l"
"मुह पर जो लोग हमारी वाह वाह करते हैं llपीठ के पीछे वही लोग हाय हाय करते हैं ll"
बात कुछ भी हो, ये दिल उन्हें दूर मानता ही नहीं,कस्तूरी थी मृग के अंदर, पर वो जानता ही नहीं l
जो गुज़ारी न जा सकी हमसेहमने वो ज़िंदगी गुज़ारी है।