इश्क न हुआ कोहरा हो जैसे...तुम्हारे सिवा कुछ दिखता ही नहीं...
कुछ यूँ हुआ कि जब भी जरुरत पड़ी मुझे, हर शख्स इतेफाक से मजबूर हो गया..
लगातार हो रही असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए,कभी कभी गुच्छे की आखरी चाबी ताला खोल देती है.
बुलंदी तक पहुंचना चाहता हूँ मै भी. पर गलत राहो से होकर जाऊ.. इतनी जल्दी भी नही..!!