बेवज़ह की बातों में उलझ जाता हूं,वक़्त की रेत पर फिसल जाता हूं lमुझे मेरी खबर कहाँ रहती है अब,क्योंकि मैं अब उसके दिल में रहता हूं l
बहुत मन से चाहा था उसने,फिर उसका मन ही ना रहा lसारी मुश्किलों में भी निकला था,उसका पता मैने..उस पते का पता फिर मुझे भी ना रहा l
"ये इश्क़ की अजीब बीमारी हैहर धुन से अपना राब्ता लगता हैकंही दूर, कैसी भी आवाज़ हो,आवाज़ उसने दी ऐसा लगता हो "
इश्क़ करो तो बेहिसाब करो बिछड़ना तो एक दिन है ही
इश्क़ करो तो बेहिसाब करो
बिछड़ना तो एक दिन है ही