किसी ने खत में लिखा है "ताबिश"यहाँ कुछ दिन से बारिश हो रही है ।
एक तरफ तेरी बढ़ेगी नराजगी,और एक तरफ बेचैनी मेरी lएक बार लगेगा की फासला बढ़ रहा,और फिर लगेगा कितने करीब है रहा l
मेरे रोने का जिस में क़िस्सा हैउम्र का बेहतरीन हिस्सा है
जुबान पे तेरा नाम लाया हैं
उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से
तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिए बनाया है
मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देना
यक़ीं आ जाएगा पलकों तले भी दिल धड़कता है