माना नाराजगी की हद सिर्फ इतनी है की आप थोड़े दिनों तक हमसे बात नहीं करोगे मगर ....... इन हदों को तोड़ आपने तो हमे भुला ही दिया।
माना नाराजगी की हद सिर्फ इतनी है की
आप थोड़े दिनों तक हमसे बात नहीं करोगे
मगर .......
इन हदों को तोड़ आपने तो हमे भुला ही दिया।
है कठिन तो ये घड़ी पर,वक़्त से लड़ जायेंगे..हम परिंदे आसमां के,पंख ले उड़ जायेंगे...
एक रोज निकाल कर सारे पुराने ख़त पढ़ लेना,हर ख़त का एक ही जवाब 'मोह्हबत' लिख देना l
दायरों में बंद हमारा प्यार,जाने कब तक हमें तड़पायेंगेहोते पंक्षी तो कोई बंदिश ना होती,पंख हमारे रोज हमें मिलवाते l
तुम भी बदल गये,
हम भी बदल गये,
तब जाके ये ज़माना बदला..