मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत कामैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का
मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
"उसे पाने की कोशिश में, खुद को खो चुका हूँ,कई बार टूटे है सपने, मैं कई बार रो चुका हूँ l"
Reh na paoge bhula kar dekh lo,
Yakin na aaye to aajma kar dekh lo,
Har jagah mehsus hogi meri kami,
Apni mehfil ko kitna bhi saja kar dekh lo…
ना छेड किस्सा-ए-उल्फत, बडी लम्बी कहानी है,
मैं ज़माने से नहीं हारा, किसी की बात मानी है,,,,,,।।
Ek Tere Na Rehne Se Badal
Jaata Hai Sab Kuch……
Kal Dhoop Bhi Deewar Pe
Poori Nahi Utri…