मेरे यादों का रुख़ आज भी,तेरी गली में होता रहता है lवो कल भी बेखबर था,वो आज भी बेखबर है,वो बस चैन से सोता रहता है
किसी ने खत में लिखा है "ताबिश"यहाँ कुछ दिन से बारिश हो रही है ।
एक तरफ तेरी बढ़ेगी नराजगी,और एक तरफ बेचैनी मेरी lएक बार लगेगा की फासला बढ़ रहा,और फिर लगेगा कितने करीब है रहा l
"मोह्हबत में गुलाब के पौधे नहीं,
बरगद का पेड़ लगाया है..
आज तो खूबसूरत कुछ भी नहीं,
कल के उम्मीदों का आसमां सजाया है l"❤