इश्क़ में मिले दर्द तो रोना कैसा यार,
यही एक जख़्म हम हँस के रखते है l
मेरे यादों का रुख़ आज भी,तेरी गली में होता रहता है lवो कल भी बेखबर था,वो आज भी बेखबर है,वो बस चैन से सोता रहता है
किसी ने खत में लिखा है "ताबिश"यहाँ कुछ दिन से बारिश हो रही है ।
वो आज भी मेरे Password में रहती है
जिसे भूलने का दावा मैं रोज करता हूँ
आफत है तेरे खत के फाड़े हुये पुर्जे,रख्खे भी नहीं जाते फेंके भी नहीं जाते..
एक तरफ तेरी बढ़ेगी नराजगी,और एक तरफ बेचैनी मेरी lएक बार लगेगा की फासला बढ़ रहा,और फिर लगेगा कितने करीब है रहा l