मेरे अनकहे "अलविदा" को…
तुम्हारे फिर से मिलने का इंतज़ार हैं ।
एक डर सा लगा हुआ है मुझे,वो बिना शर्त चाहता है मुझे ।
"हर नज्म में तुमको लिखा है,हर शब्द में तुमसे मिला है,ये दिल आवरगी में भी रहा हो,कलम उठा तुमसे ही मिला है l"
मैंने लिख दिए है, गीत तुम्हारे लिए,जब भी जी चाहे गुनगुना लेना,हम सदा थोड़ी रहंगे,नाराजगीं के लिए तेरे पास,आज हूँ, थोड़ा मुस्कुरा लेना l
"अगले पल ज़िंदगी ना जाने,कौन सा रंग दिखायेगी lहम है,रोज नये सपने खरीदते है,ना जाने वो,कैसे फ्रेम में आएगी l"
उन्हें शिकायत है कि,हम उन्हें इतना क्यों सोचते है,क्या गुजरेगी जान के, हम उन्हें हर लम्हें में जीते है l