रिश्तों में भरोसा
और
मोबाइल पे नेटवर्क न हो,
तो
लोग गेम खेलने लगते है...
"काश ऐसी भी
हवा चले "
कौन किसका है
पता तो चले..??
वक्त के साथ सब बदल जाता है,
पुराने जमाने में जिसे ठेंगा कहते थे,
उसे आज लाईक कहते हैं!
जबसे औरंगजेब मार्ग का नाम अब्दुल कलाम मार्ग हुआ है, भीड़ कम हो गई है....क्योकिअब्दुल कलाम के मार्ग पर चलना वाकई मुश्किल है|