ना मुस्कुराने को जी चाहता हैं,
ना कुछ खाने-पीने को जी चाहता हैं,
अब ठंड बर्दास्त नही होती,
सब कुछ छोडकर रजाई में घुस जाने को जी चाहता हैं
मुझे मत ढूँढों इस जहां की तन्हाई में…
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अरे !!!
ठंड बहोत है…
मैं तो हूँ अपनी रजाई में..
हाथी के पैरो के बीच में से निकल जाओ लेकिन यूपी और बिहार की बस के बगल से कभी मत निकलना पता नहीं साला कब कौन खिड़की से गुटखा थूक दे..
दो गूंगे उ उ करके बात कर रहे थे इससे पहले की मुझे दया आती...कमीनो ने गुटखा थूक कर बात करना शुरू कर दिया!!
Kapil Sharma: राहत साहब, पाकिस्तानियो को कश्मीर राग के अलावा' कोई' और राग सिखाइए न....Rahat Fateh Ali Khan: कोशिश की थी भाई, सब के सब बे-सुरे है...
मौसम विभाग की चेतावनी है कि कपड़े धोने के बाद उसे कमरे में ही सुखाएं , छत में सुखाने पर गर्मी में वो सुख के जल भी सकते है !