बड़ा नेक रिश्ता है फेफड़ों का पेड़ों के साथजो एक का उत्सर्ग है वही दूसरे का आहार
"मैंने खुद को,उसमें खो दिया,फिर मैंने उसे खो दिया l"
"कोई गीत ओंठो पे, ठहर जाती है,फिर तेरी याद बहुत आती है,तेरे हाथो के तरफ, मेरे हाथो का सफऱ,अधूरी है, देखो!पूरी ही नहीं हो पाती है l"
"तुम रहो दूर मुझे, ये बर्दास्त मुझे,पर जहाँ रहो बस, सलामत रहो lतुम्हारे आँखों में ना रहूँ, मंजूर मुझे,मेरी मोह्हबत की, अमानत रहो l"
अलविदा कहो पुराने साल को, गले लगाओ नये साल को
कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की