मेरे सपनों को तोड़ने को,नींद मुझसे लड़ती रही lमुझे भी जिद थी, जितने की,मैं एक पल भी सोया नहीं l
दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
जिस को गले लगा लिया वो दूर हो गया