"अब तुझसे क्या शिकवा करूं, लेकिन
तेरी यादों की बारिश ने तबाही बहुत मचाई है।"
तेरे ख्यालों में चलते चलते कहीं फिसल न जाऊं मैं,
अपनी यादों को रोक ले के शहर में बारिश का मौसम है।
तुम्हें बारिश पसंद है मुझे बारिश में तुम,
तुम्हें हँसना पसंद है मुझे हस्ती हुए तुम,
तुम्हें बोलना पसंद है मुझे बोलते हुए तुम,
तुम्हें सब कुछ पसंद है और मुझे बस तुम।
कल रात मैंने सारे ग़म आसमान को सुना दिए
आज मैं चुप हूँ और आसमान बरस रहा है
इस बारिश को देख कर मन भी भीग सा गया
लगता है जैसे उसने भी मेरी तरह कोई अपना खोया है.!