माना नाराजगी की हद सिर्फ इतनी है की आप थोड़े दिनों तक हमसे बात नहीं करोगे मगर ....... इन हदों को तोड़ आपने तो हमे भुला ही दिया।
माना नाराजगी की हद सिर्फ इतनी है की
आप थोड़े दिनों तक हमसे बात नहीं करोगे
मगर .......
इन हदों को तोड़ आपने तो हमे भुला ही दिया।
एक रोज निकाल कर सारे पुराने ख़त पढ़ लेना,हर ख़त का एक ही जवाब 'मोह्हबत' लिख देना l
दायरों में बंद हमारा प्यार,जाने कब तक हमें तड़पायेंगेहोते पंक्षी तो कोई बंदिश ना होती,पंख हमारे रोज हमें मिलवाते l
तुम्हारे इश्क़ का मौसम,
हर मौसम से सुहाना होता है
प्यार मोहब्बत तो सभी करते हैं,
दर्द-ए -जुदाई से सभी डरते हैं,
हम न तुमसे प्यार करते हैं ना ही मोहब्बत,
हम तो बस तुम्हारी एक मुस्कराहट के लिए तरसते हैं।
काश एक ख्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर,
वो आके गले लगा ले मेरी इजाजत के बगैर।