होता हूँ अकेला तो खुद के पास होता हूँ,कहाँ खो गया हूँ मैं भीड़ में ये सोचता हूँ l
मंजर भी बेनूर था और
फिजायें भी बेरंग थीं
बस फिर तुम याद आये
और मौसम सुहाना हो गया
"जब कोई पूछता है, 'प्यार समझते हो ',लबों पे तुम्हारा नाम आते-आते रह जाता है l"
“उसकी याद हमें बेचैन बना जाती हैं,
हर जगह हमें उसकी सूरत नज़र आती हैं,
कैसा हाल किया हैं मेरा आपके प्यार ने,
नींद भी आती हैं तो आँखे बुरा मान जाती हैं.”
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
है प्यार नाम जिसका, एक ऐसी है क़ैद दोस्तों,
ज़िन्दगी बीत जाती है पर सज़ा ख़त्म नहीं होती |