होता हूँ अकेला तो खुद के पास होता हूँ,कहाँ खो गया हूँ मैं भीड़ में ये सोचता हूँ l
मंजर भी बेनूर था और
फिजायें भी बेरंग थीं
बस फिर तुम याद आये
और मौसम सुहाना हो गया
"कितने बंधनों में बँधी है, तुमसे ये मोह्हबत मेरी,याद कर सकते है, पर खबर नहीं ले सकते तेरी l"
“उसकी याद हमें बेचैन बना जाती हैं,
हर जगह हमें उसकी सूरत नज़र आती हैं,
कैसा हाल किया हैं मेरा आपके प्यार ने,
नींद भी आती हैं तो आँखे बुरा मान जाती हैं.”
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
हँसकर हर दुःख छिपाने की,
आदत है बड़ी मशहूर मेरी ,
लेकिन कोई हुनर काम नहीं आता,
जब इन होंठो पर किसी ख़ास का नाम आता है।