तुझे भूल जाऊँ मेरे दिल से सिफारिश न कर,बेशक तू बेदख़ल कर दे पर लावारिस ना कर!
तुझे भूल जाऊँ मेरे दिल से सिफारिश न कर,
बेशक तू बेदख़ल कर दे पर लावारिस ना कर!
क्या करोगे तुम मुझसे ऐसी मुलाकातजहा बिछड़ने का रिवाज न हो.
क्या करोगे तुम मुझसे ऐसी मुलाकात
जहा बिछड़ने का रिवाज न हो.
काश कहीं से मिल जाते वो अल्फाज हमें भी जो तुझे…
बता सकते कि हम शायर कम तेरे दीवाने ज्यादा हैं…
वो आज भी मेरे Password में रहती है
जिसे भूलने का दावा मैं रोज करता हूँ
आफत है तेरे खत के फाड़े हुये पुर्जे,रख्खे भी नहीं जाते फेंके भी नहीं जाते..
और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया