ब्लैक होल क्या हैं?

What is a Black Hole?

हमारी पृथ्वी इस विशाल और रहस्य से भरे हुए ब्रह्माण्ड का एक छोटा सा अंश मात्र हैं. इस ब्रह्मण्ड में ऐसे अनगिनत प्लानेट हैं जिसमें अलग अलग सूर्य, चन्द्रमा और  तारे हैं. हमारी पृथ्वी जिस गैलेक्सी में आती हैं उसे साइंटिस्ट मिल्की वे यानी आकाश गंगा कहते हैं.  इसी तरह ब्रह्माण्ड में कई सारे गैलक्सी हैं जिनमें अलग अलग सौरमंडल मौजूद हैं. ये पूरा ब्रह्मण्ड ऐसे असंख्य रहस्यों से भरा हुआ हैं. 

इन्हीं में से सबसे ज्यादा चर्चित रहस्य हैं ''ब्लैक होल'' का.  ब्लैक होल आज भी वैज्ञानिकों के लिए अनसुलझी पहेली की तरह हैं जिसे वैज्ञानिक कई सालों से सुलझाने का प्रयास कर रहें हैं. तो सबसे पहले ये जाना जरुरी हैं कि आख़िर ये ब्लैक होल क्या चीज़ हैं? ये ब्रह्मण्ड के किस कोने में हैं? और अगर इसमें कोई गिर जाएँ तो उसका क्या होगा? 

ब्लैक होल क्या हैं?

ब्लैक होल जिसे हिंदी में कृष्ण विवर या कृष्ण गुहा भी कहते हैं. सामन्य शब्दों में अगर समझने की कोशिश करें तो ब्लैक होल अंतरिक्ष में स्थित एक ऐसा छिद्र हैं जिसका गरूत्वाकर्षण बहुत तेज़ हैं और ये हर एक पदार्थ को अपने अंदर समाहित करने की क्षमता रखता हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार एक ब्लैक होल पूरी गैलेक्सी को अपने अंदर अवशोषित कर सकता हैं. इसलिए इसे विज्ञान की भाषा में अंतरिक्ष का राक्षस भी कहा जाता हैं. एक ऐसा राक्षस जो सूर्य को भी निगल सकता हैं. 

ब्लैक होल अपने ऊपर पड़ने वाला पूरा प्रकाश सोख लेता हैं और इस वजह से ये काला नज़र आता हैं. 

ब्लैक होल एक ऐसा पदार्थ हैं जिसके ऊपर भौतिक विज्ञान यानी फिजिक्स का कोई भी सिद्धांत लागू नहीं होता हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक यहाँ पर समय एक दम ठहर जाता हैं. 

ब्लैक होल कहाँ पर हैं और अगर इसमें कोई गिर जाएँ तो उसका क्या होगा ? 

हालही में हुए वैज्ञानिक खोजों के मुताबिक ब्लैक होल पृथ्वी से करीब 1000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर एक ब्लैक होल पाया गया हैं. जो कि आकर में सूर्य से लगभग 4-5  गुना ज्यादा बड़ा हैं. 

वैज्ञानिकों के अनुसार ब्लैक होल अपने ऊपर से गुजरने वाले हर एक पदार्थ को सोख लेता हैं. अगर आप अंतरिक्ष में अपने रॉकेट से उड़ रहें हो और आप गलती से इसके पास पहुँच गए तब क्या होगा? 

ऐसी परिस्थिति में दो चीज़े हो सकती हैं, 

Mystery of Black Hole

  • 1. या तो आप ब्लैक होल में तुरंत जल कर राख़ हो जायेंगे.
  • 2. या फिर  आप इसके अंदर फँस जायेंगे और जब भी आप अगर ज़िंदा वापस आएंगे तो ऐसा लगेगा की वहां पर बिताया गया 5 मिनट पृथ्वी के 20 सालों के बराबर भी हो सकता हैं. अगर किसी ने हॉलीवुड मूवी ''इंटरस्टेलर'' देखीं हो तो उसे ये कॉन्सेप्ट बहुत जल्दी समझ में आ जायेगा. 

वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि जब कोई बड़ा तार अपने अंतिम समय पर होता हैं यानी उसका रेडियो एक्टिव विघटन पूरा हो जाता हैं तो वो अपने अंदर ही सिमटने लगता है और धीरे धीरे वो एक ब्लैक होल बन जाता हैं और अपने अंदर हर एक पदार्थ को अवशोषित करने लगता हैं. 


ब्लैक होल के बाहरी पार्ट को इवेंट हॉराइज़न कहते हैं और क्वांटम प्रभाव के कारण इसके अंदर से गर्म कण टूट टूट कर बाहर अंतरिक्ष में फैलना शुरू हो जातें हैं. महान साइंटिस्ट हॉकिंग के मुताबिक एक दिन हॉकिंग रेडिएशन की वजह से ब्लैक होल मॉस रहित हो जायेगा और फिर वो पूरी तरह ग़ायब हो जायेगा. 

ब्लैक होल का केंद्र अंदर से बहुत घुमावदार होता हैं इसलिए वहाँ पर पहुँचने के बाद फिजिक्स के सारे रूल निरर्थक हो जाते हैं, समय और स्पेस दोनों का महत्व यहाँ ख़त्म हो जाता हैं.