पिता की मार से बचने के लिए अपने घर से 500 रुपए लेकर मुंबई भागे थे रविकिशन

When Ravi Kishan Ran Away From His Home For Becoming A Hero

रविकिशन का नाम उन चुनिंदा स्टार्स के लिस्ट में आता हैं. जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और दमदार एक्टिंग से न सिर्फ भोजपुरी सिनेमा बल्कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपना एक अलग मुकाम बनाया हैं. 

रविकिशन को भोजपुरी सिनेमा का सुपरस्टार माना जाता हैं. मगर उनके शुरुआती दिनों की कहानी बहुत ही इमोशनल और प्रेरणादायक हैं. आज रविकिशन के पास हिंदी सिनेमा से लेकर तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में बहुत ऑफर हैं. लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें के पास पैसे नहीं थे और वो फिल्मों में फ्री में काम करने को भी तैयार थे. रविकिशन ने बॉलीवुड में 30 से भी ज्यादा हिट फिल्मों में काम किया हैं. जिसमें तेरे नाम, जिला गाजियाबाद, मुक्केबाज और एजेंट विनोद जैसी फ़िल्में शामिल हैं. तो चलिए जानते हैं रविकिशन की संघर्ष के दिनों की कहानी कि कैसे वो घर से भागकर इतने बड़े एक्टर बने?

अस्पताल की फीस के लिए जमीन तक रख दी गिरवी 

रविकिशन ने अपना सिक्का न सिर्फ सिनेमा जगत में चलाया बल्कि उन्होंने राजनीति में भी खूब सुर्खियां बटोरी. मौजूदा समय में वो गोरखपुर उत्तर प्रदेश के एमपी हैं. लेकिन अपने संघर्ष के दिनों में रविकिशन ने गरीबी के कई बुरे दौर भी देखें हैं. उस दौर में इनके पास हॉस्पिटल के बिल चुकाने के पैसे नहीं थे. जिसके चलते इन्हें अपनी जमीन तक गिरवी रखनी पड़ी थी. इनकी माली हालत बहुत खस्ता थी. अपनी नवजात बच्ची को अस्पताल से घर लाने के लिए इन्हें पैसे ब्याज पर लेने पड़े थे. 

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जब प्रोड्यूसर ने कहा पैसे मांगे तो रोल काट लूंगा 

रविकिशन ने एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष दिनों के बारे में बताते इस बात का भी जिक्र किया था. रविकिशन ने बताया कैसे एक बार उन्होंने एक बार वो मुंबई में तेज बारिश में भीगते हुए स्टूडियों पहुंचे थे. जिसके बाद उन्होंने वहां 8 घंटे की शूट पूरी की. लेकिन जब बाद में उन्होंने  प्रोड्यूसर से पैसे मांगे तो,  प्रोड्यूसर ने कहा, रोल दे दिया हैं. वो भी क्या कम हैं. अगर दोबारा पैसे की बात की तो रोल काट दूंगा. 

सिर्फ 500 रुपए लेकर हीरो बनने के लिए घर से भाग गए थे रविकिशन 

बचपन से ही फिल्मों में काम करना और हीरो बनना रविकिशन का सपना रहा हैं. इसलिए जब उनके पिता इसके बारे में जानते थे. तो बहुत गुस्सा होते थे. कई बार तो उन्होंने रविकिशन को बेल्ट से पीट देते थे. लेकिन रविकिशन पर हीरो बनने की धुन सवार थी. जिसके लिए वो घर से 500 रुपए लेकर मुंबई भाग गए थे. जहां पर उन्होंने खूब संघर्ष और मेहनत करने के बाद आज इस सफलता को हासिल किया हैं. 

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दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार किया हैं अपने नाम 

रविकिशन ने अपनी काबिलियत के बल पर इंडस्ट्री में इतना बड़ा नाम बना रखा हैं. उन्हें अपनी दमदार एक्टिंग के लिए दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया हैं. साल 2005 में आयी फिल्म तेरे नाम में रविकिशन को बेस्ट सपोर्टिंग रोल के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था. इसके अलावा रविकिशन को भोजपुरी फिल्म कब होई गवनवा हमार के लिए सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय फिल्म केटेगरी में राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया था.