एक अकेले से ये रस्म अदा नहीं होती…शुरुआत ही ‘दो’स्ती की ‘दो’ से होती है!
tujhe pyaar karte hai karte rahenge
ki dil banke dil mein dhadkte rahenge
tera naam le le ke jite rahenge
tera naam le le ke marte rahenge
ये दबदबा,ये हुकुमत,ये नशा, ये दौलतें………
सब किरायदार है, घर बदलते रहते हैं……
बड़े ही चुपके से भेजा थामेरे महबूब ने मुझे एक गुलाबकम्बख्त उसकी खुशबू नेसारे शहर में हंगामा कर दियाHappy Rose Day
न जाने किस तरह का इश्क कर रहे हैं हम,
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम।।