उसी का शहर, वही मुद्दई, वही मुंसिफ
हमीं यकीन था, हमारा कुसूर निकलेगा
यकीन न आये तो एक बार पूछ कर देखो
जो हंस रहा है वोह ज़ख्मों से चूर निकलेगा
लेके मौसम की बहार
आया बसंत ऋतू का त्यौहर
आओ हम सब मिलके मनाएं
दिल में भरकर उमंग और प्यार
बसंत पंचमी की बधाई
काश तकदीर भी होती किसी जुल्फ की तरह…
जब जब बिखरती संवार लेते…
दिलो के मिलने का मौसम है
दूरियां मिटाने का मौसम है
होली का त्यौहार ही ऐसा है
रंगो में डूब जाने का मौसम है
नहीं ‘मालूम ‘हसरत है या तू मेरी मोहब्बत है,बस इतना जानता हूं कि मुझको तेरी जरूरत है।