रिमझिम तो है मगर सावन गायब है,बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है..!!क्या हो गयी है तासीर ज़माने की यारोंअपने तो हैं मगर अपनापन गायब है !
उठा लो दुपट्टे को ज़मीन से कहीं दाग़ न लग जाए,
पर्दे में रखो चेहरे को कहीं आग न लग जाए।
बेटा : पापा एक बात बोलू?
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पापा : हा
बेटा : फेसबुक पर मेरे 15 फेक आईडी है
पापा : हरामखोर तू मुझे क्यों बता रहा है
बेटा : आप जिस रिया को 10 दिन से चाय पे बुला रहे है वो मै ही हु
पापा : दे थप्पड़ दे लात दे थप्पड़ दे लात
Us Fiza Mein Bhi Jalta Raha
Mein Kisi Ke Liye…..
Jaha Charaag Bhi Taraste They Roshni Ke Liye…
याद आयेगी हमारी तो बीते कल को पलट लेना ..
यूँ ही किसी पन्ने में मुस्कुराते हुए मिल जायेंगे ..