तू कातिल तेरा दिल कातिल, तेरे चेहरे का तिल कातिल,आइना मत देखना हम नशीं, कहीं टकरा न जाए कातिल से कातिल।
तू कातिल तेरा दिल कातिल, तेरे चेहरे का तिल कातिल,
आइना मत देखना हम नशीं, कहीं टकरा न जाए कातिल से कातिल।
शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है
वफ़ा की ज़ंज़ीर से डर लगता है,कुछ अपनी तक़दीर से डर लगता है.जो मुझे तुझसे जुदा करती है,हाथ की उस लकीर से डर लगता है!
Vo samjhta hai ki har shakhs badal jata hai…..
Ussey lagta hai zamana us ke jaisa hai….
मुझे सहल हो गई मंजिलें वो,
हवा के रुख भी बदल गये,
तेरा हाथ, हाथ में आ गया,
कि चिराग राह में जल गये।