शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है
चंदन की लकड़ी फूलों का हार,अगस्त का महीना सावन की फुहार,भैया की कलाई बहन का प्यार,मुबारक हो आपको रक्षा-बंधनका त्यौहार।
आलम तो ये न था कि दूरियाँ इतनी बढ़ जाये,पर बेक़रारी ने तो हद कर दी।
आलम तो ये न था कि दूरियाँ इतनी बढ़ जाये,
पर बेक़रारी ने तो हद कर दी।
वो मुझे भूल गयी है लेकिन उसकी यादें अब भी मुझे रुलाती है जितना भूलना चाहूँ म उन यादों को वो यादें उतनी ही याद आती है।
वो मुझे भूल गयी है लेकिन
उसकी यादें अब भी मुझे रुलाती है
जितना भूलना चाहूँ म उन यादों को
वो यादें उतनी ही याद आती है।
प्यार का इजहार नही किया जाता,
इकरार किये बगैर जो दिल को छू जाये,
वो ही तो प्यार है!!