आखिर ज़िन्दगी ने पूछ ही लिया कहा है वो शख्सजो तेरी ज़िन्दगी में सब से अज़ाज़ शक था
तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने ग़ालिब,कि सारी उम्र हम अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे।
ज़िदगी जीने के लिये मिली थी,
लोगों ने सोच कर गुज़ार दी……
तैरना तो आता था हमें मुहब्बत के समंदर में
लेकिन जब उसने हाथ ही ना पकड़ा तो डूब जाना ही अच्छा था
इस दिल को किसी की आहट की आस रहतीहै, निगाह को किसी सूरत की प्यास रहती है,तेरे बिना जिन्दगी में कोई कमी तो नही, फिरभी तेरे बिना जिन्दगी उदास रहती है॥