लम्हो में बदल जाते हैं मौसम के तेवर…
कुदरत की नजाकत भी हसीनो से कम नहीं!
तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे,
मगर अब आँख भर आती है तुम नजर नही आते हो।
मैं तेरे हिज़ार की बरसात में कब तक भीगू!!ऐसे मौसम में तो दीवारे भी गिर जाती है..
काश तकदीर भी होती किसी जुल्फ की तरह…
जब जब बिखरती संवार लेते…
ठण्ड में वादा नही करते कि दोस्ती निभायेंगे,
जरूरत पड़ी तो सब कुछ ले लो,
पर रजाई न दे पायेंगे....