किरदार और भी थे कई दास्तान-ए-ज़िन्दगी में,
सिर्फ तुम ही बने मोहब्बत ये बात कुछ और है!
शायर तो हम
“दिल” से है….
कमबख्त “दिमाग” ने
व्यापारी बना दिया.
तलाश मेरी थी और भटक रहा था वो,
दिल मेरा था और धड़क रहा था वो,प्यार का तालुक भी अजीब होता है,आंसू मेरे थे सिसक रहा था वो..
Khwab Sach HO To Manzil Mil Jaati Hai,
Yaad Aksar Tasvir me Dhal Jati Hai,
Kisi k Liye Kuch Mango To Dilse Mango Qki
1 Dua Se taqdir Badal Jati hai…
Na Samajh Sakoge Qayamat Tak Jise Tum,,
Qasam tumhari tumhen itna pyar karte hain..