“आँखों से दूर दिल के करीब था,
में उस का वो मेरा नसीब था.
न कभी मिला न जुदा हुआ,
रिश्ता हम दोनों का कितना अजीब था.”
बंदा नहीं है कोई टक्कर
का आज की तारीख में,
इसीलिए लफ्ज कम पड़
जाते है हमारी तारीफ़ में..!!
कोई पुछ रहा हे मुजसे मेरी जीन्दगी की कीमंत....मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना......
राहुल गांधी गुजरात में अपने ड्राइवर से
ये आगे ट्रक के पीछे क्या लिखा है?
ड्राईवर – कृपया हॉर्न दीजिये।
राहुल गांधी – अजीब आदमी है।
अबे हॉर्न दे देंगे तो बजायेंगे क्या ?
😓😓😓😳😳😳
पलकों से रास्ते के काटे हटा देंगे,
फूलों को क्या हम अपना दिल बिछा देंगे।
टूटने ना देंगे अपनी दोस्ती को कभी,
बदले में हम खुद को मिटा लेंगे।।