मेरे महाकाल तुम्हारे बिना मैं शून्य हूँ …..
तुम साथ हो महाकाल तो में अनंत हूँ …
जय श्री त्रिकालनाथ महाकाल….
खुद की पर्वा किए बिना दिन रात अन्न उपजाता है, सलाम है इस धरती माँ के पुत्र को जिसके कारण हमारा जीवन मुस्काता है।
छत टपकती हैं, .. उसके कच्चे घर की……
फिर भी वो किसान करता हैं दुआ बारिश की..
जिसकी नीति अच्छी होगी,
उसकी हमेशा उन्नत होगी,
“मैं श्रेष्ट हूँ”… यह आत्मविश्वास है,
लेकिन
“सिर्फ मैं ही श्रेष्ट हूँ”…यह अहंकार है।
जगह-जगह में शिव हैं हर जगह में शिव है
है वर्तमान शिव और भविष्य भी शिव हैं !
आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाए
जीवन बहती नदी है, अतः हर परिस्थिति में आगे बढे
जहा कोशिश का कद बड़ा होता है
वह नसीबो को भी झुकना पड़ता है