“ऊंचाई पर वही पहुँचते है,
जो बदला नहीं बदलाव लाने की सोच रखते है.”
शत्रु को सदैव भ्रम में रखना चाहिए ।
जो उसका अप्रिय करना चाहते हो तो उसके साथ सदा मधुर व्यवहार करो
उसके साथ मीठा बोलो । शिकारी जब हिरण का शिकार करता है
तो मधुर गीत गाकर उसे रिझाता है, और जब वह निकट आ जाता है,
तब वह उसे पकड लेता है
संस्कारों से बड़ी कोई वसीयत नहीं होती
और ईमानदारी से बड़ी कोई विरासत नहीं होती
धागा एक बार टूट जाये तो फिर से जोड़ने पर भी गाँठ पड़ ही जाती है
उसी तरह रिश्ते एक बार टूट जाये तो फिर से जोड़ने में एक गाँठ बन ही जाती है
यदि आप डर पर विजय पाना चाहते हैं तो घर बैठे उसके बारे में सोचिये मत. बाहर निकालिए और अपने काम मे व्यस्त हो जाइये।