भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाता हैऔर दूसरों पर रखो तो कमजोरी बन जाता है…सुप्रभात
लोग पूछते हैं हमसे
कि तुम अपने प्यार का इज़हार क्यों नहीं करते;
तो हमने कहा जो लफ़्ज़ों में बयां हो जाए
हम उनसे प्यार उतना नहीं करते…
शायर तो हम
“दिल” से है….
कमबख्त “दिमाग” ने
व्यापारी बना दिया.
नज़रें मिल जाएं तो प्यार हो जाता है,
पलकें उठ जाएं तो इज़हार हो जाता है,
ना जाने क्या कशिश है आपकी चाहत में,
कि कोई अनजान भी...
भरोसा क्या करना गैरों पर,जब गिरना और चलना है अपने ही पैरों पर।