खिड़कियाँ कमरों की थोड़ी खोलते क्यों नहीं,
बहते मंद समीर से थोड़ा मिलते क्यों नहीं l
नई सुबह में नई बात सोचों,
नए विचारों के साथ खुद से मिलते क्यों नहीं l
शुभ प्रभात
गुज़र गया वो वक़्त जब तेरे तलबगार थे हम.
अब खुद भी बन जाओ तो सजदा न करेंगे..!
कितने आंसू बहूँगा उस बेवफा के लिए
जिसको खुदा ने मेरे नसीब मैं लिखा ही नहीं….
जब भी विंटर सीजन आती हैं,
कसम से तेरी याद बहुत आती हैं,
दिल सोचता है मेरा बार-बार
मेरा इनर कब लौटाओगे यार…
Happy Happy Winter Season
Man Hi Man Karati Hu Baatein
Dilki Her Ek Baat Kah Jaati Hu
Ek Baar Le Lo Bahon Mai Ab To Sajna
Yahin Her Baar Kahte Kahte, Ruk Jaati Hu!!!
Happy Hug day 2018 to u dear.
रिश्तों की ख़ूबसूरती एक दूसरे की बातें बर्दाश्त करने में है,
ख़ुद जैसा इन्सान तलाश करोगे तो अकेले रह जाओगे।