"उसकी अहसासों की शौल ओढ़ जब लेता हूँ,उसी साँसो की गर्माहट में जुदाई काट लेता हूँ,यादों ने उनके,साथ मुझसे जोड़ा है कुछ ऐसा,मुस्कुराते हुए, तन्हाई काट लेता हूँ l"
गलत सुना था कि
मोहब्बत आँखों से होती है,
दिल तो वो भी चुरा लेते हैं
जो पलकें नहीं उठाते!!
दोस्त बनकर भी वो नहीं साथ निभानेवाला,
वही अंदाज़ है उस ज़ालिम का ज़माने वाला।
मोमबती के अंदर पिरोया गया
धागा मोमबती से पूछता है.. ..
"" जब मैं जलता हूं तो तू क्युं
पिघलती (रोती) है ।
मोमबती ने सुंदर जवाब
दिया ....
कहा कि-----
जब किसी को दिल के अंदर
जगह दी हो और वो ही छोड़के
चला जाये तो रोना तो आयेगा ही...
फिर से मिले वो आज अजनबी से बनकर,और हमें आज फिर से मोहब्बत हो गई।