उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
वो मुझे भूल गयी है लेकिन उसकी यादें अब भी मुझे रुलाती है जितना भूलना चाहूँ म उन यादों को वो यादें उतनी ही याद आती है।
वो मुझे भूल गयी है लेकिन
उसकी यादें अब भी मुझे रुलाती है
जितना भूलना चाहूँ म उन यादों को
वो यादें उतनी ही याद आती है।
ये ना पूछ कितनी शिकायतें हैं तुझसे ऐ ज़िन्दगी,
सिर्फ इतना बता की तेरा कोई और सितम बाक़ी तो नहीं।
वफ़ा की ज़ंज़ीर से डर लगता है,कुछ अपनी तक़दीर से डर लगता है.जो मुझे तुझसे जुदा करती है,हाथ की उस लकीर से डर लगता है!
ऐसा नहीं था कि इस दिल में तेरी तस्वीर नहीं थी
लेकिन इन हाथों में तेरे नाम की लकीर ही नहीं थी