गहरी हो जाती है हर दफ़ा मुहब्बत मेरी..
जाया नहीं जाता तेरा बार बार रूठना ..
हर रात को तुम इतना
याद आते हो के हम भूल गए हैं,
के ये रातें ख्वाबों के लिए होती हैं,
या तुम्हारी यादों के लिए
कैसे एक लफ्ज़ में बयां कर दूँ
दिल को किस बात ने उदास किया
Jis ke naseeb mein hon zamaney ki thokarein…!!
Us bad-naseeb sey na sahar’on ki baat ker…
Humne to khud se inteqam lia ,
Tumne kya soch kar humse mohabbat ki?