सजदा से करबला को बंदगी मिल गई
सबर से उम्मत को जिंदगी मिल गई
एक चमन फातिमा का गुज़रा
मगर सारे इस्लाम को जिंदगी मिल गई.
कितने मूर्ख हैं
हम भगवान के बनाए फलों को भगवान को ही अर्पण करके धन दौलत माँगने लगते हैं
हमसफ़र खूबसूरत नहीं
बल्कि सच्चा होना चाहिए
पापा को अपने आज क्या उपहार दू,
तोहफे दे फूलों के या गुलाबों का हार दू,
हमारी जिंदगी में जो है सबसे प्यारे,
उन पर तो अपनी जिंदगी ही वार दू।
अब ये हसरत है कि सीने से लगाकर तुझको
इस क़दर रोऊँ की आंसू आ जाये