फूल से दोस्ती करोगे तो महक जाओगे;
सावन से दोस्ती करोगे तो भीग जाओगे;
हमसे करोगे तो बिगड़ जाओगे;
और नहीं करोगे तो किधर जाओगे।
किसी भी मुशकिल का अब किसी को हल नही मिलता ,
शायद अब घर से कोई माँ के पैर छूकर नही निकलता
खुदा की फुर्सत में एक पल आया होगा,
जब उसने तुझ जैसा प्यारा इंसान बनाया होगा,
न जाने कौन से दुआ कुबूल हुई हमारी,
जो उसने मुझे तुझसे मिलाया होगा
बरस रहे बादल आँखे रो रहीतन्हाई हर बात कह रहीजाये तो कहा जायेहर ओर गम की हवा चल रहीबड़ा अजीब मंजर है इश्क कामर चुका मानस मगर साँस चल रही
एक हम हैं, जो
समझे नहीं खुद को अब तक।
और एक दुनिया है, जो
पता नहीं हमें क्या-क्या समझती है।