हवा भी रूक जाती है कहने को कुछ तराने,
बारिश की बूंदे भी उसे छूने को करती है बहाने..!!
आहिस्ता आहिस्ता कीजिये कत्ल मेरे अरमानों का……
कहीं सपनों से लोगों का ऐतबार ना उठ जाए..
हम क्या कर चुके हैं
इससे ज्यादा महत्वपूर्ण ये है
कि अभी क्या करना बाकि है
– मैरी क्यूरी
बलबुध्धि विद्या देहू मोहि
सुनहु सरस्वती मातु
राम सागर अधम को
आश्रय तूही देदातु!!
बुराई को देखना और सुनना ही
बुराई की शुरुआत है