उदास नज़रो में ख़्वाब मिलेंगे।
कभी काटे तो कभी गुलाब मिलेंगे।
मेरे दिल की किताब को मेरी नज़रो से पढ़ कर तो देखो।
कही आपकी यादे तो कही आप मिलेंगे ।
अगर तुमसे कोई पूछे बताओ ज़िन्दगी क्या है,हथेली पर जरा सी राख़ रखना और उड़ा देना।
क़सूर उनका नहीं,जो मुझसे दूरियाँ बना लेते है….
रिवाज है ज़माने में,पढ़ी किताबें ना पढ़ने का.....
Ye mout bi badi ajeeb chiz hei yaro…
Sala Ek Din Marne ke liye Puri Zindgi Jini padTi hey…
Main uske haathon ka khilona hi sahi;
kuch der ke liye hi sahi, usne mujhe chaha to hai..