वो बात क्या करें जिसकी कोई खबर ना हो।
वो दुआ क्या करें जिसका कोई असर ना हो।
कैसे कह दे कि लग जाय हमारी उमर आपको।
क्या पता अगले पल हमारी उमर ना हो।
मैं अगर चाहु भी तो शायद ना लिख सकूं उन लफ़्ज़ों को
जिन्हे पढ़ कर तुम समझ सको की मुझे तुम से कितनी मोहब्बत है..!!
किसी को क्या बताये की कितने मजबूर हू ,
चाहा था सिर्फ एक तुमको और तुमसे ही दूर हू .
काश कोई हम पर भी इतना प्यार जताती,
पीछे से आकर वो हमारी आँखों को छुपाती,
हम पूछते की कौन हो आप …??
और वो मुस्करा कर खुदको हमारी जान बताती.
ये मुहब्बत कब, किससे हो जाये इसका अंदाजा नहीं होता
ये वो घर है जिसका कोई दरवाजा नहीं होता
बस एक चुप सी लगी है, नहीं उदास नहीं!कहीं पे सांस रुकी है!नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!कोई अनोखी नहीं, ऐसी ज़िन्दगी लेकिन!खूब न हो, मिली जो खूब मिली है!नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!सहर भी ये रात भी, दोपहर भी मिली लेकिन!हमीने शाम चुनी, हमीने शाम चुनी है!नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!वो दासतां जो, हमने कही भी, हमने लिखी!आज वो खुद से सुनी है!नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!