ये मिलावटी रिश्तो का दौर है साहब..
यहाँ नफरतो से इल्जाम भी सादगी के लिबास में लगाए जाते है..
Diye Hain Zindagi Ne Zaḳhm Aise;Ki Jin Ka Waqt Bhi Marham Nahin Hai!
कोई मिला नहीं तुम जैसा आज तक,पर ये सितम अलग है की मिले तुम भी नही
पापा को अपने आज क्या उपहार दू,
तोहफे दे फूलों के या गुलाबों का हार दू,
हमारी जिंदगी में जो है सबसे प्यारे,
उन पर तो अपनी जिंदगी ही वार दू।
ईश्वर हर जगह नहीं हो सकते
इसलिए उन्होंने माँ को बनाया