लोग क्या कहेंगे
यह सोच कर जीवन जीते हैं
भगवान् क्या कहेंगे
क्या कभी इसका विचार किया ?
आकाश से ऊँचा कौन – पिता
धरती से बड़ा कौन – माता
चलो ज़िन्दगी को जिंदादिली से जीने के लिए एक छोटा सा उसूल बनाते हैं,
रोज़ कुछ अच्छा याद रखते हैं, और कुछ बुरा भूल जाते हैं।
आज भी मेरी फरमाइशें कम नही होती,
तंगी के आलम में भी, पापा की आँखें कभी नम नहीं होती.
आपके हाथों से कोई छीन सकता है
लेकिन जो नसीब में है उसे कोई नहीं छीन सकता...