बड़े खुशकिस्मत होते वे लोग जिन्हे
"समय" और "समझ" दोनों एक साथ मिलती है
क्यूंकि अक्सर "समय" पर "समझ" नहीं आती
और जब "समझ" आती है तो "समय" हाथ से
निकल जाता है
वर्षों से दहलीज़ पर कड़ी वो मुस्कान है,
जो हमारे कानो में धीरे से कहती है,
“सब अच्छा होगा”
सफलता ना मिले तो घबराना नही,
रुक कर सोचना तो पाओगे की ,
कुछ कदम चलना अभी शेष है।
संस्कारों से बड़ी कोई वसीयत नहीं होती
और ईमानदारी से बड़ी कोई विरासत नहीं होती
मुक्तसर सी ज़िन्दगी है मेरी तेरे साथ जीना चाहता हूँ,कुछ नहीं मांगता खुदा से बस तुझे मांगता हूँ.