एक पागल आइने में खुद को देख
कर सोचने लगा यार इसको कहीं देखा हूँ।
काफी देर टेंसन में सोचते सोचते-----
धत्त तेरी की ये तो वही है
जो उस दिन मेरे साथ बाल कटवा रहा था
तकदीर के हाथों खुद को में जोड़ना नहीं चाहता,
मेरे दो हाथो का होसला में तोडना नहीं चाहता,
मौसम की तरह बदल जाती ये हाथो की लकीरें,
बंद मुट्ठी मेरी हरगिज़ मैं खोलना नहीं चाहता।
चाँद की हद १ रात तक है,सूरज की हद सिर्फ दिन तक है,हम दोस्ती में दिन-रात नहीं देखते,क्यूंकि हमारी दोस्ती की हद आखरी साँस तक है
एक बार एक पंजाबी U.P. गया,और वहां एक कुए में गिर गया…एक आदमी वहां से गुजरा और उसने पंजाबी के चिल्लाने की आवाज सुनी…U.P. वाला :- “अबे कौन है बे कुए के भीतर?”पंजाबी :- “ओ पाजी ! अस्सी हां”U.P. वाला :- अबे दो-चार होते तो निकाल भी देते…अब अस्सी को कौन निकाले…पडे रहो भीतर ही…
ये दबदबा,ये हुकुमत,ये नशा, ये दौलतें………
सब किरायदार है, घर बदलते रहते हैं……